उदयपुर में बोले ओम बिरला, ‘हल्दीघाटी का युद्ध सिर्फ इतिहास नहीं, देशभक्ति का जीता-जागता प्रतीक है’

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उदयपुर में बोले ओम बिरला, 'हल्दीघाटी का युद्ध सिर्फ इतिहास नहीं, देशभक्ति का जीता-जागता प्रतीक है'

मेवाड़ की ऐतिहासिक और वीर भूमि ने हमेशा से पूरी दुनिया को साहस, वीरता और स्वाभिमान का एक बड़ा संदेश दिया है। राजस्थान के उदयपुर में महान योद्धा महाराणा प्रताप की स्मृति में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने देशवासियों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन देशभक्ति, अद्वितीय त्याग और अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए लगातार किए गए संघर्ष की एक ऐसी मिसाल है, जो हर पीढ़ी को सही रास्ता दिखाती रहेगी।

ओम बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि महाराणा प्रताप की वीरता और उनके आदर्श आज के डिजिटल दौर में भी देश के युवाओं के लिए सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं।

महलों का ऐशो-आराम छोड़ जनता के लिए चुनी संघर्ष की राह

अपने संबोधन में लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि महाराणा प्रताप चाहते तो महलों के ठाठ-बाठ और ऐशो-आराम की जिंदगी जी सकते थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर संघर्ष का रास्ता चुना। उन्होंने अपनी जनता की सेवा, मेवाड़ की संप्रभुता और देश के मान-सम्मान की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

इतिहास के पन्नों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मेवाड़ का यह संघर्ष पूरी दुनिया में अनोखा है। बेहद सीमित संसाधन होने के बावजूद महाराणा प्रताप ने स्थानीय भील समुदाय और आम नागरिकों को एकजुट किया। उन्होंने सभी को साथ लेकर देश की अस्मिता और पहचान को बनाए रखने के लिए जबरदस्त हौसले और अटूट विश्वास के साथ लड़ाई लड़ी।

हल्दीघाटी का युद्ध महज इतिहास नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद की सीख है

मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए श्री ओम बिरला ने कहा कि यह धरती महारानी पद्मिनी, महाराणा कुंभा, महाराणा प्रताप और राणा पुंजा जैसे महान राष्ट्रभक्तों की है, जिनकी गाथाएं आज भी रगों में देशभक्ति का संचार करती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हल्दीघाटी का ऐतिहासिक युद्ध केवल इतिहास की किताबों और कोर्स तक सीमित कोई सामान्य घटना नहीं है। यह असल में अन्याय के खिलाफ खड़े होने और राष्ट्रवाद की भावना का एक जीता-जागता प्रतीक है, जो हर नागरिक को अपने देश के प्रति जवाबदेह बनाता है।

संस्कृति और आधुनिक टेक्नोलॉजी के मेल से बनेगा ‘विकसित भारत’

इतिहास की इन महान सीखों को आज के समय और भविष्य के लक्ष्यों से जोड़ते हुए लोक सभा अध्यक्ष ने देश के युवाओं से एक खास अपील की। उन्होंने कहा कि भारत को एक ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए आज के नौजवानों को उसी कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट समर्पण के साथ काम करना होगा, जैसा जज्बा हमारे पूर्वजों में था। जैसे-जैसे भारत वैश्विक पटल पर आगे बढ़ रहा है, हर नागरिक में जिम्मेदारी की भावना होना बेहद जरूरी है।

उन्होंने विकास की एक नई परिभाषा देते हुए कहा कि एक सच्चा विकसित भारत वही कहलाएगा, जहां हमारी प्राचीन संस्कृति और गौरवशाली पहचान भी सुरक्षित रहे और देश के पास आज के जमाने की सबसे आधुनिक तकनीक (Technology) भी हो। उन्होंने भरोसा जताया कि मेवाड़ का यह गौरवमयी इतिहास आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा और स्वाभिमान के मार्ग पर चलने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

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