RBI Nominee Rules: बैंक खाताधारक की मृत्यु के बाद नॉमिनी को कितने दिनों में मिलता है पैसा? जानें क्या हैं नए नियम

RBI Rules on Bank Account Nominee: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनहोनी कभी भी और किसी के साथ भी हो सकती है। लोग जीवन के इसी उतार-चढ़ाव से अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए बैंक खातों में अपनी गाढ़ी कमाई जमा करते हैं। ऐसे में हर खाताधारक (Account Holder) के लिए अपने बैंक अकाउंट में नॉमिनी (Nominee) का नाम दर्ज कराना बेहद जरूरी होता है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अगर खाताधारक के साथ कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसके परिवार या नॉमिनी को पैसों के लिए भटकना न पड़े और वे आसानी से फंड निकाल सकें।

लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि खाताधारक की मृत्यु के बाद नॉमिनी कितने समय में पैसा निकाल सकता है? क्या इसके लिए कोई निश्चित समय सीमा होती है? और यदि नॉमिनी लंबे समय तक पैसा न निकाले तो उस फंड का क्या होता है? आइए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों के तहत इन सभी सवालों के सटीक जवाब बेहद आसान शब्दों में जानते हैं।

मृत्यु के बाद कितने दिनों के भीतर क्लेम करना जरूरी है?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, खाताधारक की मृत्यु के बाद नॉमिनी द्वारा पैसा निकालने या क्लेम करने की कोई निश्चित या अंतिम समय सीमा (DeadLine) तय नहीं की गई है।

इसका मतलब यह है कि नॉमिनी खाताधारक के निधन के तुरंत बाद, या कुछ महीनों बाद, यहाँ तक कि कुछ सालों बाद भी बैंक में जाकर पैसों के लिए दावा पेश कर सकता है। कोई भी बैंक सिर्फ इस आधार पर क्लेम खारिज या रिजेक्ट नहीं कर सकता कि नॉमिनी ने आवेदन करने में देरी कर दी है। हालांकि, किसी भी तरह की कानूनी या प्रशासनिक जटिलता से बचने के लिए यह सलाह दी जाती है कि अनहोनी के बाद जितनी जल्दी हो सके क्लेम की प्रक्रिया को पूरा कर लेना चाहिए।

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अगर नॉमिनी पैसा न निकाले, तो क्या डूब जाता है फंड?

यदि किसी बैंक खाते में जमा रकम पर कई सालों तक कोई दावा नहीं किया जाता है, तो लोग सोचते हैं कि वह पैसा सरकार या बैंक का हो जाता है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है।

फैक्ट चेक: बैंकिंग नियमों के मुताबिक, यदि किसी खाते में लगातार 10 वर्षों तक कोई लेन-देन नहीं होता है, तो उस डिपाजिट को ‘अनक्लेम्ड डिपॉजिट’ (Unclaimed Deposit) यानी लावारिस जमा माना जाता है। बैंक इस पैसे को रिजर्व बैंक के ‘डिपाजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस’ (DEA) फंड में ट्रांसफर कर देते हैं। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पैसा हमेशा के लिए डूब गया। नॉमिनी जब भी चाहे, जरूरी दस्तावेज दिखाकर बैंक से अपना पूरा पैसा ब्याज सहित वापस ले सकता है।

कितने दिनों में पैसा देने के लिए बाध्य है बैंक? जानें RBI का नियम

आरबीआई के कड़े नियमों के मुताबिक, जब नॉमिनी बैंक के पास जाकर सभी आवश्यक और वैध दस्तावेज जमा कर देता है, तो बैंक को 15 दिनों के भीतर क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को पूरा करना होता है। यानी दस्तावेज जमा होने के अधिकतम 15 दिनों के अंदर नॉमिनी को पैसा ट्रांसफर करना अनिवार्य है।

क्लेम के लिए कौन से डॉक्यूमेंट्स हैं जरूरी और क्या है प्रोसेस?

पैसा निकालने के लिए नॉमिनी को उस बैंक शाखा (Bank Branch) में जाना होगा जहाँ खाताधारक का अकाउंट था। वहाँ क्लेम फॉर्म भरकर निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:

  • खाताधारक (Account Holder) का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (Original Death Certificate)।
  • नॉमिनी का वैध पहचान पत्र और एड्रेस प्रूफ (जैसे पैन कार्ड, [Aadhaar Redacted], या वोटर आईडी)।
  • मृतक खाताधारक की बैंक पासबुक, चेकबुक या एटीएम कार्ड।

यदि खाताधारक से पहले नॉमिनी की मृत्यु हो जाए तो क्या होगा?

यह एक बेहद महत्वपूर्ण स्थिति है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यदि खाताधारक के जीवित रहते ही रजिस्टर्ड नॉमिनी की मृत्यु हो जाती है, तो वह नॉमिनेशन अपने आप अमान्य (Void) हो जाता है। ऐसी स्थिति में खाताधारक को तुरंत अपने बैंक जाकर नया नॉमिनी दर्ज कराना चाहिए।

यदि खाताधारक नया नॉमिनी दर्ज कराए बिना ही गुजर जाता है, तो बैंक में जमा राशि उस व्यक्ति के कानूनी वारिसों (Legal Heirs) को दी जाती है। इसके लिए परिवार को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) या विधिक वारिस प्रमाण पत्र जैसे कानूनी दस्तावेज बैंक के सामने पेश करने होते हैं, जिसमें थोड़ी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसीलिए समय रहते नॉमिनी को अपडेट रखना सबसे समझदारी का काम है।

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